अपने जमीर को यूँ ही ना मरने दें 

केविन कार्टर याद है किसी को ? अरे वही प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र जिसने वो प्रसिद्ध फ़ोटो खिंची थी जिसमें एक बच्चा के मरने का गिद्ध इंतजार कर रहा था कि कब बच्चा मरे की उसे खाए। सुनील कुमार झा की रिपोर्ट-

अपने जमीर को यूँ ही ना मरने दें 
Image Courtesy- Amar Ujala

केविन कार्टर याद है किसी को ? अरे वही प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र जिसने वो प्रसिद्ध फ़ोटो खिंची थी जिसमें एक बच्चा के मरने का गिद्ध इंतजार कर रहा था कि कब बच्चा मरे की उसे खाए। अरे वही प्रसिद्ध फ़ोटो जिसके लिए उस फोटोग्राफर को पुलित्ज़र पुरस्कार मिला था । वही फ़ोटोग्राफर जिसका जमीर जिंदा था और कुछ दिन बाद ही सही लेकिन उसने आत्महत्या कर लिया था । पता है क्यों ? पुलित्ज़र पुरस्कार के दिन एक पत्रकार ने उनसे कहा था, पता है उस दिन वहां एक नहीं दो-गिद्ध थे। एक ने अपने हाथ मे कैमरा पकड़ रखा था।

अब आते हैं सूरत हादसे पर। सरकार को कितना भी कोस लीजिए। फायर बिग्रेड और दमकल विभाग को लाख गालियाँ दीजिए लेकिन एक बात जरूर याद रखिए उस दिन जो वहां हादसा हुआ उसमें आग से ज्यादा भूमिका उन लोगों ने निभाई जिन्होंने हाथ मे मोबाइल पकड़े हुए थे। जिन्हें जान बचाने से ज्यादा वीडियो बनाने की पड़ी थी। अगर वो वीडियो बनाना छोड़कर नीचे कोई कपड़ा पकड़ कर खड़े हो जाते तो शायद कूदते हुए बच्चे की जान बच सकती थी । लेकिन नहीं हमें तो हर बार सरकार कोसना है, उनकी व्यवस्थाओं को कोसना है। फिर चाहे इसके लिए उन्हें अपना जमीर ही क्यों न मारना पड़े । शेम ऑन यू सूरतवासी । तुम्हारी सीरत मर गई है ।

(सुनील कुमार झा के ये अपने विचार हैं)